डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की पुलिस ने प्रतिबंधित तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (टीएलपी) पर एक बार फिर नरम रुख अपनाने के संघीय सरकार के फैसले का विरोध किया है।

डॉन न्यूज ने अपनी एक हालिया रिपोर्ट में बताया कि इमरान खान सरकार की ओर से टीएलपी के सैकड़ों कार्यकर्ताओं को रिहा करने और अन्य के खिलाफ मामले वापस लेने संबंधी घोषणा का पुलिस ने विरोध किया है।

पुलिस सूत्रों ने कहा कि टीएलपी द्वारा हिंसक विरोध प्रदर्शन के दौरान कर्तव्यों का पालन करते हुए उनके कर्मियों ने जीवन का बलिदान दिया और घायल हो गए। हर बार सरकार ने समूह के साथ सुलह कर ली, इस बात की परवाह किए बिना कि पुलिस पर पेट्रोल बम और ईंट-पत्थरों से कैसे हमला किया गया और उन्हें घायल किया गया। पुलिस ने नाराजगी जताते हुए कहा कि समूह के सदस्यों ने उनके वाहनों को आग के हवाले किया है और उनके हथियार व अन्य सामान भी छीना गया है, ऐसे में उनके साथ नरम रुख अपनाना गलत है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि यह सार्वजनिक संपत्ति को हुए नुकसान के अलावा है। यानी समूह के सदस्यों ने सार्वजनिक संपत्ति को भी कई बार नुकसान पहुंचाया है।

कानून प्रवर्तन एजेंसी पाकिस्तान के आंतरिक मंत्री शेख राशिद के उस बयान पर प्रतिक्रिया दे रही थी, जिसमें उन्होंने कहा था कि सरकार ने अब तक 350 टीएलपी कार्यकर्ताओं को रिहा कर दिया है । हम अभी भी टीएलपी के निर्णय के अनुसार मुरीदके की सड़क के दोनों किनारों को खोलने का इंतजार कर रहे हैं।

मंत्री ने चौथी अनुसूची की लिस्ट की समीक्षा करने का भी वादा किया था, जिसमें उनके खिलाफ दर्ज सभी पिछले मामलों को वापस लेने के अलावा प्रतिबंधित नेताओं और कार्यकर्ताओं के नाम शामिल हैं।

एक डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल-रैंक के अधिकारी ने सरकार के इस कदम पर निराशा व्यक्त करते हुए सत्तारूढ़ अभिजात वर्ग को दोषी ठहराया है। अधिकारी ने कहा, सरकार को या तो कानून लागू करने वालों के साथ या फिर टीएलपी के साथ खड़ा होना होगा। टीएलपी के सैकड़ों लोगों को तत्काल रिहा करने का उसने त्वरित समझौते ने संगठन के हिंसक आंदोलन के दौरान पुलिसकर्मियों द्वारा दिए गए बलिदान और उनके द्वारा खोए गए जीवन को नजरअंदाज कर दिया है।

पुलिस ने रविवार से आतंकवाद और कई अन्य आरोपों के तहत समूह के शीर्ष नेताओं और टीएलपी के कट्टर कार्यकर्ताओं के खिलाफ कई मामले दर्ज किए हैं।

(आईएएनएस)

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